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भारत के भाषाई राजदूत

भारत के भाषाई राजदूत  डॉ पुनीत बिसारिया*
यह लेख भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद की पत्रिका गगनांचल के विश्व हिन्दी सम्मेलन विशेषांक में प्रकाशित हुआ है, जिसका विमोचन 10 सितम्बर 2015 को दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन का भोपाल में उद्घाटन करते हुए प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने किया.

आपको याद होगा कि जब राज कपूर की फिल्म आवारा आयी थी, तो उस समय उसके एक गीत ‘आवारा हूँ’ से भारत की पहचान जुड़ गयी थी. इस गीत की लोकप्रियता का यह आलम था कि उस दौरान राज कपूर जिस देश में भी जाते थे, उस देश में वहां की जनता उनका स्वागत ‘आवारा हूँ’ कहकर ही किया करती थी.वैश्विक धरातल पर विदेशियों के बीच उन्माद के स्तर पर हिन्दी की लोकप्रियता का यह सबसे पहला बड़ा प्रमाण है. इसके बाद हिन्दी का दिग्विजयी रथ रुका नहीं और वह आगे सरपट दौड़ता गया जिसका परिणाम सम्पूर्ण विश्व में हिन्दी के प्रति प्रेमभाव के रूप में आज हमारे समक्ष है. हिन्दी की लोकप्रियता और सहज स्वीकारोक्ति की एक बड़ी वजह यह भी रही कि इसने लिपि, शुद्धता या क्लिष्टता के बंधन को कभी स्वीकार नहीं किया और अन्य भाषाओँ के शब्दों को भी स्नेह से गले लगाकर अपना बना लिया. जिस भ…