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Showing posts from July 11, 2015

यादे फैज़ाबाद .

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फैज़ का अरबी में अर्थ है विजेता और सफल लेकिन फैज़ाबाद शहर का दुर्भाग्य है कि न तो यह नाम के मुताबिक विजेता है और न ही सफल. अवध के पहले नवाब सआदत  अली खां ने सन 1730  में जब यह शहर बसाया और इसे अपनी राजधानी बनाया था, तब शायद उन्होंने सोचा होगा कि ये शहर अपने नाम के अनुरूप सफल विजेताओं का शहर साबित होगा लेकिन वे खुद बहुत कम समय यहाँ रह सके.करनाल के युद्ध में नादिरशाह के खिलाफ मुगलों की ओर से लड़ते हुए वे 19 मार्च सन 1739 को मारे गए;  अवध के दूसरे नवाब सफदरजंग के बाद तीसरे नवाब शुजाउद्दौला के जमाने में इस शहर ने भव्यता की पराकाष्ठा को छुआ. किला, गुलाबबाड़ी, मोतीमहल, बहू बेगम का मक़बरा जैसीअवध की शान कही जाने वाली इमारतें उसी के दौर में बनीं. उनके सलाहकार दराब अली खां ने सन 1816 में उनकी बेगम की मृत्यु के पश्चात् तीन लाख रूपए की लागत से उनका मक़बरा बनवाया जो अवध की स्थापत्य कला का श्रेष्ठ नमूना है. अवध के चौथे नवाब आसफुद्दौला ने यदि सन 1775 में अवध की राजधानी को फैज़ाबाद से लखनऊ न शिफ्ट किया होता तो कौन जाने आज उत्तर प्रदेश की राजधानी फैज़ाबाद होती.
खुशी की बात है कि आज भी स्वप्निल श्रीवास्तव, अ…