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Showing posts from May 17, 2016

इक्कीसवीं शताब्दी में हिन्दी का भविष्य

नवें दशक के प्रारम्भ में उदारीकरण, निजीकरण तथा भूमंडलीकरण (एलपीजी) के आगमन के साथ ही समाजशास्त्रीय चिंतक हिन्दी का मर्सिया पढ़ने लगे थे किन्तु इसके विपरीत ये पिछले दो दशक हिन्दी की वैश्विक स्वीकृति का खुशनुमा माहौल लेकर आये हैं. करिश्माई बॉलीवुड का सिनेमा, विश्व भर में फैले प्रवासी भारतीयों का हिन्दी प्रेम, योग की वैश्विक स्वीकृति, भारतीय अध्यात्म एवं दर्शन के प्रति विदेशियों में बढ़ रहा अनुराग तथा दुनिया के अनेक देशों में सफलतापूर्वक आयोजित हुए विश्व हिन्दी सम्मेलनों ने विश्व का हिन्दी के प्रति ध्यान आकर्षित किया है और अब विदेशी राष्ट्राध्यक्ष भी हिंदीभाषियों तथा हिन्दी की अपने-अपने देशों में अपरिहार्यता को महसूस करने लगे हैं.यह अनायास नहीं कि ब्रिटेन के आम चुनाव को जीतने के लिए डेविड कैमरन को ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘अबकी बार कैमरन सरकार’ जैसे विशुद्ध हिन्दी के नारे गढ़ने पड़ते हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति को भारतीय पर्वों को मनाने हेतु आगे आना पड़ता है और हिन्दी में भाषण देकर अपनी हिन्दी अनुरक्ति का परिचय देना पड़ता है. दुनिया के पाँचों महाद्वीपों के लगभग सभी प्रमुख राजनेताओं को भारत और ह…